A collection of hindi poems for children on nature, festivals and games
मंगलवार, 22 दिसंबर 2020
सोमवार, 23 सितंबर 2019
पर्यावरण और प्रकृति
प्रकृति का नजारा है बदला,
नीला आसमां हो गया धुंधला,
गंदगी से हुआ सागर काला,
पेड़ों की नही है शीतल छाया,
नीला आसमां हो गया धुंधला,
गंदगी से हुआ सागर काला,
पेड़ों की नही है शीतल छाया,
धुँये ने है प्रदूषण बढ़ाया।
फूलों की खुशबू वाली मस्त हवा,
अब मिट्टी बदबू के साथ आती,
नाक आंख को बंद कर जाती,
जंगल काट शहर बसाया,
पों पों कर कारो ने शोर मचाया।
पहले बारिश रिमझिम आती,
अब आंधी तूफान का शोर मचाती,
अनाज पशू खेत बहाकर ले जाती,
क्यों बाढ़ तूफान भूकम्प आया,
मानव ने प्रकृति को दुश्मन बनाया।
आओ हम प्रकृति को करे प्यार,
उस पर ना डाले अधिक भार,
संजोये सँवारे और करे दुलार,
संजोये सँवारे और करे दुलार,
पेड़ पोधे फल फूल लगाये,
वातावरण को सुन्दर स्वच्छ बनाये।
बुधवार, 23 मार्च 2016
राखी
राखी का त्यौहार लाया खुशियाँ हजार
भाई बहन का प्यार देता जीवन में बहार
हो जहाँ भी जैसे भी
चाहे बूढ़े हो या बच्चे
कभी दूर तो कभी पास
मन में है आशा विश्वास
आएगा जब राखी का त्यौहार
याद करेगे भाई बहन अपना प्यार
यह राखी का धागा
तेरी कलाई पर बांधा
तू रक्षा करना मेरी
मै दुआए मागूँ तेरी
जीवन में छाई रहे मस्ती
सुख शांति वैभव से
बनी रहे हमेशा चुस्ती
रक्षा बन्धन का त्यौहार आता रहे
भाई बहन को मिलाता रहे
राखी का त्यौहार लाया खुशियाँ हजार
भाई बहन का प्यार देता जीवन में बहार
हो जहाँ भी जैसे भी
चाहे बूढ़े हो या बच्चे
कभी दूर तो कभी पास
मन में है आशा विश्वास
आएगा जब राखी का त्यौहार
याद करेगे भाई बहन अपना प्यार
यह राखी का धागा
तेरी कलाई पर बांधा
तू रक्षा करना मेरी
मै दुआए मागूँ तेरी
जीवन में छाई रहे मस्ती
सुख शांति वैभव से
बनी रहे हमेशा चुस्ती
रक्षा बन्धन का त्यौहार आता रहे
भाई बहन को मिलाता रहे
मंगलवार, 21 अप्रैल 2015
INTRODUCTION OF SATRANGIN KAVITAREN
डॉ नीरा रस्तोगी --MA .PHD in ECONOMICS ,PROF in college ..कॉलेज में पढ़ाने और सयुंक्त परिवार के कारण समय कैसे पंख लगा के उड़ गया पता ही नहीं चला
हिंदी हमारी राष्टभाषा और मातृभाषा होने के कारण मेरा बचपन से इस के प्रति बहुत अनुराग था
संस्कृत और हिंदी भाषा मे स्नातक होने के कारण महान कवियों का साहित्य पढ़ने का भी सौभाग्य मिला
उस समय अनेक कवितायेँ कठस्थ कर ली थी जो आज भी याद
तब मैंने अपने बच्चो को छोटी छोटी कविता हिंदी में बना कर सिखाई थी बच्चो के मुख से सुनने में बहुत आनंद आया था। तब मैंने सोच लिया था की मै बालकविता लिखूँगी
DR NEERA RASTOGI..M.A .PHD इकोनॉमिक्स कॉलेज में पढ़ाने के कारण समय पंख लगा कर उड़ गया
अब रिटायर्ड होने के बाद जब अवकाश मिला तो अपनी लेखनी जाग्रत हो गयी।
छोटे छोटे बच्चे हिंदी में कविता सुने ,सुनाये और गाये यह मेरा सपना है।मेरी किताब
सतरंगी कवितायेँ अतरंगी खेल में मैंने उन सभी विषयो पर लिखा है जो बच्चो की जिंदगी से जुड़ा है। सरल भाषा ,गीतात्मक ,लयबद्ध कविता जब बच्चा अभिनय करके सुनाता है तो हम बड़े लोगो का मन भी थिरक जाता है ह्रदय आनंदमय हो जाता है।
सतरंगी कविताएँ बच्चो को भारतीय सभ्यता ,संस्कृति खेल खेल में ही सब सिखा देती है
सहज सरल तरीके से वह अपने रीति रिवाजो से जुड़ जाते है
ज़ैसे --
नानी ओ नानी
सुनाओ हमे कोई कहानी
वह राजा रानी जिसे सुनकर
आ जाये नींद सुहानी सुहानी
गाओ लोरी अपनी जुबानी
नानी ओ नानी।
होली आई होली आई
सब है भाई भाई
तुम ना करो कोई लड़ाई
आओ तुम्हे रंग लगाये
और खूब शोर मचाये
होली आई होली आई
ऐसी सरल कवितायेँ घर के सभी सदस्य आसानी से खुद भी याद कर लेते है और बच्चो को भी अभिनय के साथ गाना सीखा देते है
वैसे भी हिंदी राष्ट्र भाषा होने के कारण हमारा दायित्व बढ़ जाता है कि हम उन्हें रोज बोलने वाली भाषा की
गरिमा ,सुंदरता ,और शब्दावली से अवगत कराये।
सतरंगी कविता अतरंगी खेल हमारी दिनचर्या से जुडी है गणेश ,चींटी तितली ,गुब्बारे आदि सभी ऐसी कविता है जिन्हे हम रोज देखते है। यह अपनापन ,दुलार ,अनुराग हमे
अंग्रेजी कविताओ से कैसे मिल सकता है.
अतरंगी खेल में बहुत सारे खेल और चित्र बने है जिन्हे बच्चे खुद बनाये ,रंग भरे,आकर दे। कविता पर
अभिनय करे ,गा गा कर सुनाये और नाचे उनके आनंद की कोई सीमा नहीं है। यह पुस्तक बच्चो
के लिए ,बच्चो को समर्पित है आओ उनकी कल्पना शक्ति में पंख लगाकर उन्हें उड़ने दे।
मै आभारी हूँ अपने पति ,सहयोगी अम्बुज जी की जिन्होंने हर कदम पर मुझे प्रोत्साहन दिया
दोनों बच्चे प्रतीक पायल और बहू रानी राजश्री बहन जयश्री जिन्होंने कंप्यूटर पर ब्लॉग बनाना सिखाया
जिससे मै E BOOK बनाकर AMAZON KINDLE पर प्रकाशित कर पाई.मेरा आभार और प्यार अपने सभी
मायके और ससुराल के सम्बंदियो और दोस्तों का जिन्हे मै FACEBOOK पर बार बार अपनी रचनाभेज कर उनका अनुमोदन पाती रही आपसे अनुरोध है ऐसे ही अपने प्यार क वर्षा मुझ पर करते रहना
नम को
शुक्रवार, 10 अगस्त 2012
Shri Krishna Janmashtmi
श्री कृष्ण जन्माष्टमी
जय जय कृष्ण कन्हैया,
जय जय कृष्ण कन्हैया।
देवकी यशोदा इनकी मैया,
गोकुल में चराये गैया,
बंसी मधुर बजाये रे,
सबके मन को भाये रे,
जय जय कन्हैया लाल की।
आला आला गोविंदा आला,
ग्वाल बाल शोर मचाये रे,
मटकी तोड़ धूम मचाये रे,
जय गोविंदा जय गोपाला।
यमुना तट पर खेले होली,
गोपियों संग करे ठिठोली,
राधा का है मनमोहन,
रास लीला रचाये रे,
किया सब को मतवाला,
जय गोपाला जय गोपाला।
अर्जुन का बना सारथी,
उपदेश गीता का सुनाये रे,
जग का पालनहारा,
कर्म का रास्ता दिखाए रे,
जय जय कृष्ण भगवान की,
जय हो मुरली धर गोपाल की,
जय जय कन्हैया लाल की।
जय जय कृष्ण कन्हैया,
जय जय कृष्ण कन्हैया।
देवकी यशोदा इनकी मैया,
गोकुल में चराये गैया,
बंसी मधुर बजाये रे,
सबके मन को भाये रे,
जय जय कन्हैया लाल की।
बाल रूप है सब को भाता,
माखन चोर वह कहलाता,आला आला गोविंदा आला,
ग्वाल बाल शोर मचाये रे,
मटकी तोड़ धूम मचाये रे,
जय गोविंदा जय गोपाला।
यमुना तट पर खेले होली,
गोपियों संग करे ठिठोली,
राधा का है मनमोहन,
रास लीला रचाये रे,
किया सब को मतवाला,
जय गोपाला जय गोपाला।
अर्जुन का बना सारथी,
उपदेश गीता का सुनाये रे,
जग का पालनहारा,
कर्म का रास्ता दिखाए रे,
जय जय कृष्ण भगवान की,
जय हो मुरली धर गोपाल की,
जय जय कन्हैया लाल की।
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