Bal Kavita (Hindi Poems for Children)

A collection of hindi poems for children on nature, festivals and games

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मंगलवार, 6 अप्रैल 2021

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Neera Rastogi <neera.rastogi@gmail.com>

Thu, Apr 1, 10:27 AM (5 days ago)
to Ambuj, me

मेरी अभिव्यक्ति 

कहते है बचपन के  संस्कारो से  ही हमारा व्यक्तित्व बनता  है.  .मुझे याद है  जब मै आठ साल की थी हम  मेरठ  के नौचंदी मेले में गए थे  वहाँ  गीता प्रेस की  प्रेरणादायी कहानी की किताबे खरीदी   उन कहानियो को पढ़ने में इतना आनन्द  आया  कि  तभी से लाइब्रेरी से किताबे लाकर पढ़ने का शौक हो गया। माध्यमिक कक्षा में भी कोई निबन्ध लिखते  हुए महान  कवियों की लिखी कविताओं के अनेक  उदाहरण देने में बहुत आनंद आता  जिससे क्लास में टीचर खूब शाबाशी देती  और सबको सुनाती थी।  हिंदी में नंबर भी   अच्छे  आते  थे  बस तभी से हिंदी भाषा मेरा पहला प्यार बन गया।

 संस्कृत और हिंदी भाषा मे स्नातक होने से  महान कवियों का साहित्य पढ़ने का भी सौभाग्य मिला उस समय अनेक कवितायेँ कठस्थ कर ली थी जो आज भी याद है  तब मैंने अपने बच्चो को  छोटी छोटी कविताये हिंदी में सिखाई थी जो स्वरचित थी.उन्हें बच्चो के मुख  से सुनने में बड़ा मजा आता तब मैंने सोच लिया था की मै बालकविता लिखूँगी।

 

परन्तु हम सोचते कुछ है और होता कुछ और ही है ऐसे संजोग हुए की अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री लेली और फिर शिक्षकों के विश्वास और प्रेरणा से डॉक्टरेट भी कर ली 

फिर  वही हुआ जो एक स्त्री के जीवन मे होता है। शादी ,परिवार ,डिग्री कॉलेज में पढ़ाना और मुंबई महा नगरी की भागदौड़। समय कैसे पंख लगाकर उड़ गया पता ही नहीं चला..कभी कभी कहानी और हास्य कविताये लिखी थी। जिम्मेदारी निभाते निभाते रिटायर्ड भी हो गए अब आगे क्या ? कहते है ना जब जागे तब सबेरा ,   रिटायर्ड होने के बाद अब अवकाश मिला तो अपनी सोई इच्छा जाग्रत हो गयी. अब अपने बच्चो के बच्चो के लिए कविता लिखना फिर से शुरू किया। धीरे धीरे ब्लॉग बनाकर कम्प्यूटर  में डालने लगी. सोशल मीडिया पर जो प्रोत्साहन और सराहना मिली उससे मेरी लेखनी ने रुकने का नाम ही नहीं लिया और फिर कविता की इंद्रधनुषी छटा बिखरती रही 

इस पुस्तक द्वारा बच्चे भारतीय त्योहारों की गरिमा ,प्रकृति की सुंदरता ,पशु पक्षियों के जीवन से मिलने वाले सन्देश और भारतीय रीति रिवाजो से जुड़ जाते है। सरल सुन्दर और कवितामय भाषा बच्चो के मन पर अनोखी और सकारात्मक छाप छोड़ जाती है 

 होली आई होली आई 

 मस्ती ही मस्ती छाई  

आशा और उमंग लाई 

होली आई होली आई

 

नानी ओ प्यारी नानी 

गाओ लोरी अपनी जुबानी 

सुनाओ परियो की कहानी

 जिसे सुनकर आजाये

 नींद सुहानी सुहानी  

प्रस्तुत है आपके सामने मेरा  सपना । मेरा सपना बस यहीं है छोटे छोटे बच्चे  हिंदी में इन कविताओं को  सुने ,सुनाये और गाये साथ ही इस किताब में हर कविता के साथ ऐसी गतिविधियां और खेल है जिन्हे करने से बच्चो की प्रतिभा का निखार होगा  

 

जब कभी मै किसी स्कूल में कविताये सुनाने गयी तो बच्चे बहुत खुश होकर सुनते और कहते कि हमें भी ऐसी कविता लिखना सिखाओ। बच्चो की सृजन शक्ति बहुत क्रियाशील होती है बस रास्ता दिखाना है।  उड़ने दो बच्चो को विचारो के पंख लगाकर अपनी सपनो की दुनिया में   . 

 

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Posted by NeeraR at मंगलवार, अप्रैल 06, 2021 कोई टिप्पणी नहीं:
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